Mujko Bhi Tarkeeb Shika Yaar Julahe
Written by Aminur Rashid   
Monday, 25 November 2013

मुझको भी तरकीब सिखा यार जुलाहे
- Gulzar sb



मुझको भी तरकीब सिखा यार जुलाहे
अकसर तुझको देखा है कि ताना बुनते
जब कोइ तागा टुट गया या खत्म हुआ
फिर से बांध के
और सिरा कोई जोड़ के उसमे
आगे बुनने लगते हो
तेरे इस ताने में लेकिन
इक भी गांठ गिराह बुन्तर की
देख नहीं सकता कोई
मैनें तो ईक बार बुना था एक ही रिश्ता
लेकिन उसकी सारी गिराहे
साफ नजर आती हैं मेरे यार जुलाहे
मुझको भी तरकीब सिखा यार जुलाहे

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Last Updated ( Monday, 25 November 2013 )